Wednesday, June 30, 2010

सत्य के खिलाफ़ असत्य एकजुट

आधे अधूरे ज्ञान के आधार पर कही गयी बात मज़ाक़ बन कर रह जाती है कोशिश यह कीजिये कि तथ्यों के आधार पर बात कहें तथा आपकी बात में नफ़रत की गंध न आये. सदैव से ही सत्य के ख़िलाफ़ असत्य एकजुट होता आया है. इसकी जिंदा मिसाल दुनिया के वर्तमान हालात हैं. ३ के नाम से जाने जाने वाले अमेरिका के आतंकवादी संगठन के सक्रिय सदस्य रहे हेरी ट्रूमैन को द्वितीय महायुद्ध में अमेरिकी जनता ने अपना प्रेसिडेंट चुनकर अपनी मानसिकता का जो परिचय दिया वो आजतक कायम है और हेरी ट्रूमैन ने अमेरिकी जनता के विश्वास को कायम रखते हुए जापान के दो नगरों पर एटम बम डालकर अमेरिका, वहां की सरकार और वहां की जनता का युद्धोन्मादी, आतंकवादी, अत्याचारी तथा मानवता के नाम पर कलंक होना साबित कर दिया और ये परंपरा आज तक कायम है अर्थात तब से लेकर आज तक अमेरिका लगातार कहीं न कहीं जंग छेड़े हुए है चाहे कोई भी प्रेसिडेंट आया हो जंग, ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी के रास्ते से नहीं हटा है. वहां के मौजूदा प्रेसिडेंट ओबामा ने आदेश जरी किया है की अब तक जो ६० देशों में अमेरिकी फ़ौज थी वह १५ और देशों में भेजकर ७५ देशों में पहुंचा दी जाएगी. अमेरिका जैसे आतंकवादी देश को यह हक किसने और क्यों दिया, क्या बता सकेंगे? अमेरिका और तथाकथित आतंकवाद के खिलाफ़ एकजुट होने वाले अमेरिका के समर्थक देश क्या सत्य के खिलाफ़ असत्य का एकजुट होना साबित नहीं कर रहे हैं? मुस्लिम देशों में जहाँ भी शरियत लागू करने की कोशिश होती है उसी के खिलाफ़ गुंडों के गिरोह में सम्मिलित सारे देश एकजुट होकर कार्रवाई करने पर आमादा हो जाते हैं क्योंकि वह दुनिया में सऊदी अरब (जहाँ शरियत के कानून की झलक है) के जैसे माहौल की कल्पना करके परेशान हो जाते हैं. क्योंकि वह समझते हैं की यदि ऐसा हुआ तो उनके अन्दर की राक्षसी प्रवृत्तियों का दमन हो जायेगा और ...........

15 comments:

arganikbhagyoday said...

jo takat war hai usi ke pichhe janata chalati hai , takt dharmik ho ya gunde badmas ka ho ya raj satta ki ho wah hamesha julm ke siwa kuchh nahi karati . hamesha koi sher ki bali nahi charhata bechari nirih bakari - bhed ki hi bali charhata hai , sher ka to shikar ya hatya kiya jata hai aur yah bhi kadawa sach hai ki bhed bkari ki jansankhya hamesha jyada hoti hai , sher ki sankhya km hi hoti hai , yah bilakul saty hai isliye koi bhi raj satta duniya me apne prabhutw ko jamane ke liye amerika jaisa hi karega agr wah gir gaya to dusara khada ho jayega yah prakrit ka niyam hai .
arganik bhagyoday .blogspot .com

Dr. Ayaz ahmad said...

सारे असत्य भी मिल कर एक सत्य को हरा नही सकते

Sharif Khan said...

Dr. Ayaz ahmad Sahib!
अफ़सोस की बात यह है कि पहले अमेरिका लोगों को ग़ुलाम बनता था और अब देश के देश अमेरिका कि ग़ुलामी पर फ़ख्र कर रहे हैं और उसकी बुरे भी अच्छाई नज़र आ रही है.

Anonymous said...

सच बात कही है.

Sharif Khan said...

अमेरिका जैसे आतंकवादी देश के हितों के खिलाफ कार्रवाई करने वाला सही माने में आतंक के खिलाफ जंग लड़ रहा है.

संजय बेंगाणी said...

बात तो सही कही है. जहाँ जहाँ सरियत कानून लागू हुआ खुशहाली ही खुशहाली देखने को मिल रही है.

Anonymous said...

बात मे दम है

Dr. Ayaz ahmad said...

शुक्रिया शरीफ खान साहब आपने मेरे ब्लाग पर आकर होसला अफ़ज़ाई की

Sharif Khan said...

संजय बेंगाणी ji!
वास्तविक खुशहाली तो चरित्र का धनी होने से मानी जाती है. आज जिन लोगों को आतंकवादी कह कर बदनाम किया जा रहा है उनके चरित्र पर दाग़ नहीं मिलते जबकि आदर्श समाज का दम भरने वालों के चरित्र को आप खूब जानते हैं.

Shah Nawaz said...

सउदी अरब में शरियत कानून लागु नहीं है, केवल एक झलक भर तो कह सकते है. वहां बादशाही कानून लागु है और सउदी अरब के कारण पूरी दुनिया में शरियत कानून को संदेह की निगाह से देखा जाने लगा है.

सहसपुरिया said...

अमेरिका हो या कोई और मुल्क, या कोई और संस्था हो इन लोगो को इस्लाम या मुसलमान से कोई परेशानी नही है. इनकी परेशानी सिर्फ़ इस्लामी क़ानून से है . आप कुछ भी करिए लेकिन शरीयत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा नही बनाइए.
क्यूँ ? ये सब जानते हैं.

Sharif Khan said...

Shah Nawaz ji!
सउदी अरब में जब शरियत के कानून की झलक मात्र से भयमुक्त समाज का निर्माण हो सकता है और अपराध का खातमा हो सकता है तो पूरी तरह से शरियत का कानून लागू होने पर आदर्श समाज का निर्माण सुनिश्चित है.

DR. ANWER JAMAL said...

apni nek koshishen jari rakhiye , jo log badalte badalte apne yag chhod baithe woh kal ko namazi bhi ban jayenge , Insha Allah .

Voice Of The People said...

(सऊदी अरब जहाँ शरियत के कानून की झलक है): asahmat

Sharif Khan said...

Voice Of The People!
(सऊदी अरब जहाँ शरियत के कानून की झलक है): asahmat
असहमत होने की वजह नज़र नहीं आती.