Saturday, July 24, 2010

poverty and its solution भूख और उसका समाधान sharif khan

महाभारत का युद्ध समाप्त होने के पश्चात् कौरवों की मां गान्धारी अपने सभी सौ पुत्रों के मारे जाने के समाचार से आहत होकर युद्ध क्षेत्र का अवलोकन करने पहुंची और जब अपने एक पुत्र के शव को पड़े देखा तो बिलखकर रोने लगी। इस मन्ज़र को देखकर वहां उपस्थित लोगों के हृदय भी द्रवित हो गए परन्तु इसके पश्चात् जब उसका एक के बाद दूसरे और दूसरे के बाद तीसरे शव से लिपटकर रोने का क्रम जारी हुआ तो इस हृदय विदारक दृश्य ने सभी उपस्थित जनों को विचलित कर दिया। वहां उपस्थित लोगों के आग्रह पर श्री कृष्ण ने इस शोकपूर्ण वातावरण को बदलने का उपाय इस प्रकार से किया कि गान्धारी को भूख का एहसास करा दिया। इस प्रकार वह भूख से इतनी विचलित हुई कि अपने पुत्रों की मृत्यु के दुःख को भूलकर पेट की भूख मिटाने का उपाय सोचने लगी। चारों ओर नजर दौड़ाने पर एक बेरी का वृक्ष दिखाई पड़ा जिसपर एक बेर लगा हुआ था। अपनी क्षुधापूर्ति हेतु गान्धारी ने उस बेर को तोड़ने का प्रयास किया परन्तु वहां तक हाथ न पहुंच पाया। हाथ बेर तक पहुंचे, इसके लिए जो तरकीब अपनाई गई उसका वर्णन रोंगटे खड़े करने देने वाला तो है ही साथ ही उससे यह भी ज़ाहिर होता है कि भूख से जो पीड़ा उत्पन्न होती है वह सारे दुःखों पर भारी है। वर्णन कुछ इस प्रकार है
जब बेर तोड़ने के लिये गान्धारी का हाथ वहां तक नहीं पहुंच पाया तो नीचे ज़मीन पर पड़े हुए अपने एक पुत्र के शव को पेड़ के नीचे तक खींच कर लाई और उस पर चढ़कर प्रयास किया परन्तु हाथ फिर भी बेर तक न पहुंच पाया। फिर दूसरे पुत्र का शव खींच कर लाई और उसको पहले पुत्र के शव के ऊपर रखा परन्तु फिर भी सफल न हो पाई। चूंकि वहां आस पास उसी के पुत्रों के शव पड़े थे इसलिये वह उन्हीं को एक के बाद एक लाती रही और बेर तोड़ने का प्रयास करती रही। इस दिल हिला देने वाली घटना के बाद भूख को गान्धारी ने इस प्रकार से बयान किया है
वसुदेव जरा कष्टम् कष्टम दरिद्र जीवनम्।
पुत्रशोक महाकष्टम् कष्टातिकष्टम परमाक्षुधा।।
अर्थात् हे कृष्ण! बुढ़ापा स्वयं में एक कष्ट है। ग़रीबी उससे भी बड़ा कष्ट है। पुत्र का शोक महा कष्ट है परन्तु इन्तहा दर्जे की भूख सारे कष्टों से भी बड़ा कष्ट है। ध्यान रहे गान्धारी ने स्वयं यह सारे कष्ट झेले थे।
हज़रत उमर (रजि०) ने ख़लीफ़ा बनने के बाद यह फ़रमाया था कि अगर एक बकरी भी भूख से मरती है तो उसका ज़िम्मेदार मैं होऊंगा। शायद इन्हीं विशेषताओं को ध्यान में रखकर देश के आज़ाद होने के बाद गांधीजी ने आम सभा में फ़रमाया था कि मैं हिन्दोस्तान में हज़रत उमर जैसी शासन व्यवस्था चाहता हूं। असहनीय भूख तो कष्टकारी होती ही है। आप कल्पना करके देखिये कि भूख से जो मौतें होती हैं वह कितनी पीड़ादायक होती होंगी। शायद पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों से भी ज़्यादा भयानक होती हों।
हमारे देश के विधायक और सांसद यदि देश सेवा का संकल्प लेकर राजनीति में आए हैं तो एक साधारण क्लर्क के बराबर वेतन के बदले देश सेवा करें। इस प्रकार से उनको मिलने वाले वेतन व भत्ते आदि से होने वाली बचत ही इतनी हो जाएगी कि उसको यदि ग़रीबों पर ख़र्च किया गया तो हमारे देश से भूख के विदा होने में देर नहीं लगेगी।

21 comments:

सहसपुरिया said...

हमारे देश के विधायक और सांसद यदि देश सेवा का संकल्प लेकर राजनीति में आए हैं तो एक साधारण क्लर्क के बराबर वेतन के बदले देश सेवा करें
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ये लोग तो खुद की सेवा का सोच कर राजनीति में आए हैं. आजकल राजनीति सेवा का नही बल्कि मेवा खाने का नाम है, किसी एक का भी नाम बता दीजिए जो आज के दोर में निस्वार्थ सेवा कर रहा हो. आज आप खुद ही देख सकते है किस तरह MP,MLA बनने के बाद इन लोगो के बैंक बॅलेन्स, जायदाद में इज़ाफ़ा होता है, और ये जनता के सेवक विदेशी गाडियो में शान से घूमते हैं. आज हज़ारो टन अनाज खुले आसमान के नीचे सड़ रहा है, है कोई इस का जवाबदेह ?
ग़लती जनता की है, चुनाव के समय सब ही उम्मीदवॉर की जाति,धर्म देख कर वोट करते है. ईमानदार को तो आज के दोर में पागल या सठिया गया कहते हैं.

सहसपुरिया said...

इस प्रकार से उनको मिलने वाले वेतन व भत्ते आदि से होने वाली बचत ही इतनी हो जाएगी कि उसको यदि ग़रीबों पर ख़र्च किया गया तो हमारे देश से भूख के विदा होने में देर नहीं लगेगी।
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इतना वेतन लेकर भी अगर ये लोग अपना काम ईमानदारी से करदे, तो सारी समस्याएँ दूर हो जाएगी. दुख तो इसी बात का हैं इतनी सब सुविधाए लेने के बाद भी ये लोग अपने काम के प्रति सजग नही हैं.

सहसपुरिया said...

इसी लिए अल्लाह ताला ने रोज़े फ़र्ज़ किए हैं, ताकि जब इक इंसान सारा दिन भूखा प्यासा रहेगा तो उसे अहसास होगा की भूख क्या होती है,

Anonymous said...

MLA & MP bhi chunki gariboon ki halat se waqif hain isliye abhi tak kiya gaya fraud aur gairzimmedari unhe kam lagti hai aur kahin wo aage gareeb na ho jaye es dar se lagatar saving kar rahe hain. Thanx to senior officers to provide them enough pace of corruption, exploiting poor citizens.

सत्य गौतम said...

श्री शरीफ जी ने दुनिया की सबसे संकीर्ण जाति के मिथकों में से एक उपदेश ढूंढने में सफलता पाई, परंतु नजर पड़ गई हमारी और हमने उनकी सफलता पर बेरियों के कांटे बिखेर दिये।

सत्य गौतम said...

झूठी है यह कहानी।
1-अगर गांधारी को भूख लगी थी तो किसी भी मृत राजा के रथ से भोजन लेकर खा सकती थी क्योंकि जो राजा लड़ने आये होंगे वे अपने साथ भोजन पानी भी तो लाए होंगे।

सत्य गौतम said...

2-सुज्ञ जैसे लोग बताते हैं कि महाभारत का युद्ध परमाणु अस्त्रों से लड़ा गया था। सो वहां तो परमाणु विकिरण ने सारे पेड़ और लाशें ही जला डाली होंगी। फिर वहां मृतक और बेरी का पेड़ होना असंभव है।

सत्य गौतम said...

3-इसके बावजूद यह सच्ची बात है कि भूख बहुत पीड़ा और अपमान देती है।

सत्य गौतम said...

4-इस बात को आप दलितों के जीवन की, बाबा साहब के जीवन की सच्ची घटनाओं के माध्यम से भी तो कह सकते थे, क्यों ?

सत्य गौतम said...

5-परंतु आपको तो सवर्णों के दिलों को जीतना है । उनकी कारों और कोठियों से आप रूआब खाते हो।

सत्य गौतम said...

6-आपको सच से सरोकार नहीं है बल्कि आपको तो बुढ़ापे में थोड़ी सी वाह वाह चाहिये।

सत्य गौतम said...

7-अरे वाह वाह तो दलित भी कर सकते हैं। थोड़ा आप उनकी तरफ कदम बढ़ाकर तो देखें।

सत्य गौतम said...

वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह ,वाह वाह ,वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह ,वाह वाह .वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह ,वाह वाह ,वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह , वाह वाह ,वाह वाह .

Mohammad Ali said...

poverty ka khatama karne ke liye diya gaya upaye sarvottam hai.lekin hume ye bhi jaan lena chahiye ki agar clerk wali salary mile to kiya aagami chunav me ticket lene ka man hamare ye diggaj aur honhaar MLA & MP rakhte hain?

muhammad maqsood ali said...

bahut umda

Anonymous said...

Islamic Personality

Good Actions

From Abu Hurairah (radiyallaahu 'anhu) who said that Allaah's Messenger (salallaahu 'alaihi wa'sallam) said: Charity (sadaqah) is due upon every joint of a person on every day that the sun rises.

Administering justice between two people is an act of charity;

and to help a man concerning his riding beast by helping him on to it or lifting his luggage on to it is an act of charity;

a good word is charity;

and every step which you take to prayer is charity;

and removing that which is harmful from the road is charity.


Bukharee


So if the servant is able to spend all his days and nights in obedience to Allaah, and in doing actions pleasing to Him, then let him do so!

Shah Nawaz said...

Behtreen Lekh!....... bahut khoob!

Shah Nawaz said...

Yeh Saty Gautam Naam ke shakhs ka dimaag thoda ajeeb lagta hai, chahe baat zaat-paat ki naa ho phir bhi zabardasti le aataaa hai.....

kya yeh keval prashansa paane ka hathkanda matr hai?

DR. ANWER JAMAL said...

Nice post .

Dr. Ayaz ahmad said...

अच्छी पोस्ट

इस्लामिक वेबदुनिया said...

अच्छी पोस्ट