Tuesday, July 6, 2010

vandematram मुसलमानों पर वन्देमातरम गीत थोपना अपराध sharif khan

पवित्र क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है,‘‘ला इकराहा फ़िद्दीन’’ अर्थात् दीन के मामले में कोई ज़बरदस्ती नहीं। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि इस्लाम किसी पर थोपा नहीं जा सकता परन्तु यदि इस्लाम धर्म का पालन करने में कोई कठिनाई या अड़चन पैदा की जाती है अथवा धर्म की शिक्षाओं के प्रचार की राह में बाधा उत्पन्न की जाती है या इस्लाम की शिक्षा के खि़लाफ़ कोई भी बात यदि मुसलमानों पर थोपी जाती है तो इन सब कठिनाइयों, अड़चनों और बाधाओं आदि के खि़लाफ़ आवाज़ उठाना हर मुसलमान का कर्तव्य (फ़र्ज़) हो जाता है। सारी ज़मीन अल्लाह ही की है। प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान करे कि धरती पर कहीं भी फ़साद न फैले, सबको सम्मान से जीने का अधिकार प्राप्त हो, किसी भी व्यक्ति की बेवजह हत्या न हो तथा व्याभिचार, बलात्कार, सूदखोरी आदि बुराइयों से लोगों को बचाया जाए।
‘‘अल्लाह के एक और केवल एक होने पर विश्वास रखना, अल्लाह के समकक्ष किसी को न समझना तथा केवल उसी की इबादत (वन्दना या पूजा) करना‘‘ इस्लाम धर्म की बुनियाद है। इस प्रकार जब अल्लाह के अलावा किसी की इबादत जाइज़ ही नहीं है और इस्लाम धर्म की मूल भावना के ही विरुद्ध है तो इसका सीधा सा अर्थ यह है कि एक मुसलमान तभी तक मुसलमान है जब तक वह अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत नहीं करता चाहे मां(जननी) हो, वतन हो, पवित्र किताब हो या फिर कुछ और हो। जहां तक मातृभूमि की पूजा का सवाल है, तो इस बारे में केवल इतना ही कहना काफ़ी है कि पूजा तो अपनी मां की भी नहीं की जा सकती जो हमारी वास्तविक जननी है। सम्मान में सर्वोच्च स्थान मां का अवश्य है परन्तु पूजनीय नहीं है। अतः मुसलमानों पर उनकी की आस्था और विश्वास के खिलाफ़ वन्दे मातरम् गीत को थोपकर क्या हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे को चोट नहीं पहुंचाई जा रही है ? अतः देश के बुद्धिजीवी वर्ग से हमारी अपील है कि वह संविधान का अध्ययन करके देखे कि वन्दे मातरम् गीत को थोपकर मुसलमानों को इस्लाम धर्म की मूल भावना के विरुद्ध कार्य करने के लिये मजबूर करना क्या संविधान के अनुसार अपराधिक कार्य है ? और यदि संविधान इसको अपराधिक कार्य मानता हो तो ऐसे लोगों के खिलाफ़ कानूनी कार्यवाही करके देश में पनप रहे नफरत के माहौल से देश को बचाने में योगदान करें।
इसके साथ ही यह बात समझना भी आवश्यक है कि इबादत हुकुम मानने को कहते हैं न कि सर झुकाने को लिहाजा जब यह कहा जाता है कि केवल अल्लाह ही की इबादत करो तो इसका सीधा सा अर्थ होता है कि सिर्फ़ अल्लाह ही का हुकुम मानो। अब चूंकि अल्लाह ने अपने अलावा किसी के आगे सर झुकाने की इजाज़त नहीं दी इसलिए वन्देमातरम कहकर इसके खि़लाफ़ अमल करके गुनाहगार नहीं बना जा सकता। इस चर्चा का निष्कर्ष यह निकला कि अल्लाह ने चूंकि देश से ग़द्दारी की भी छूट नहीं दी है लिहाज़ा वन्देमातरम न कहते हुए देश के प्रति वफ़ादार रहना तो अल्लाह के हुकुम के मुताबिक़ हर मुसलमान की मजबूरी है।

48 comments:

Sharif Khan said...

इस्लाम के उसूलों पर अमल से बहुत सी बुराइयों का खात्मा हो सकता है.

Anonymous said...

nice post

Anonymous said...

nice post

Etips-Blog Team said...

कल को आप ये भी कहेगे कि मुसलमान भाईयोँ के लिये भारतिय तिरंगा सही नही है । इनके लिये एक अलग से तिरंगा बनाओ

आप लोग हर बात मे भारत को हिन्दू ,मुस्लीम मे क्यो बाटते है । भारत एक है ।

shahadat said...

इस्लाम के उसूलों पर अमल से बहुत सी बुराइयों का खात्मा हो सकता है.

shahadat said...

इस्लाम के उसूलों पर अमल से बहुत सी बुराइयों का खात्मा हो सकता है.

sajid durrani said...

वाकई अपराध है

Dr. Ayaz ahmad said...

अच्छी पोस्ट

Dr. Ayaz ahmad said...

वंदेमातरम् पर vandeishwaram.blogspot.com पर भी बहुत अच्छे लेख है वह भी देखें

Anonymous said...

ऐसे लोगों के खिलाफ़ कानूनी कार्यवाही करके देश में पनप रहे नफरत के माहौल से देश को बचाने में योगदान करें।

Anonymous said...

"प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान करे कि धरती पर कहीं भी फ़साद न फैले, सबको सम्मान से जीने का अधिकार प्राप्त हो, किसी भी व्यक्ति की बेवजह हत्या न हो तथा व्याभिचार, बलात्कार, सूदखोरी आदि बुराइयों से लोगों को बचाया जाए। "

और दुनिया में सारे फसाद की जड़ में कहीं न कहीं मुस्लिम निहित है , हैं न अजीब बात ?

Shah Nawaz said...

शरीफ खान जी, आपने एक-एक बात बिलकुल सही कही है. मैं आपसे पूर्णत: सहमत हूँ. वैसे भी देश को देश भक्त नागरिकों की ज़रूरत है, वन्देमातरम गाने के साथ-साथ देश से गद्दारी करने वालो की नहीं. असल बात देश से प्रेम है, देश की पूजा नहीं.

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा-हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलसितां हमारा-हमारा.

जय हिंद!

विश्‍व गौरव said...

अपराध है

विश्‍व गौरव said...

वाकई अपराध है

विश्‍व गौरव said...

वाकई अपराध है

sajid durrani said...

वाकई अपराध है

Aslam Qasmi said...

वाकई अपराध है

Voice Of The People said...

क्या सिर्फ वन्दे मातरम् कह देने से कोई भी भारतीय देश भक्त हो जाएगा? और यह भी गलत है की कोई मुल्ला इसको एक बड़ा मसला बना लें और फतवे देने लगें. यह सब हकीकत में गन्दी राजनीति की देन है वरना यह कोई मसला नहीं है.
http://aqyouth.blogspot.com/2010/06/blog-post_13.html

Aslam Qasmi said...

nice

aslam qasmi said...

nice

Hiren Dahimr said...

Vande Maa Taram means Me Maatrubhumi ko Vandan (Namaskaar) karta hu. Vandan aur Pooja (Ibaadat) me agar koi farka nahi hai to mere dost sahi hai ki Vande maa taram musalmaano ko nahi gaanaa chaahie.
वन्दे मा तरम का मतलब मै मातृभूमीको वन्दन करता हु. नही की उसकी पूजा ईबादत करता हु. आपको मेरी दो हाथ जोडकर विनंति है के मेरे देशके मुसलमानो को मिसगाईड ना करे. अपना दिमाग ठीक करके देशके मुसलमानोके रोटी, कपडा, मकान एवं पढाई पे ज्यादा ध्यान दे. वन्दे मातरम न कहनेसे या कहनेसे कोई समस्या न तो अपने आप बनती है और न हि किसीका हल होता है. पढाई एक ही माध्यम है जो दोनो काम करता है.

सुज्ञ said...
This comment has been removed by the author.
सुज्ञ said...

"देश के प्रति वफ़ादार रहना तो अल्लाह के हुकुम के मुताबिक़ हर मुसलमान की मजबूरी है।"

देशभक्ति और मज़बूरी…???…………Nice post.

Anonymous said...

अबे बुढढे ये अचानक तुझे क्या सुझा बूढ़ापे मे क्या मानसिक संतुलन बिगड़ गया समाज को अशांत करने चला आया

Anonymous said...

Very good post

Anonymous said...

चूंकि अल्लाह ने अपने अलावा किसी के आगे सर झुकाने की इजाज़त नहीं दी इसलिए वन्देमातरम कहकर इसके खि़लाफ़ अमल करके गुनाहगार नहीं बना जा सकता।

I totally agree

Anonymous said...

वन्दे मातरम् गीत को थोपकर मुसलमानों को इस्लाम धर्म की मूल भावना के विरुद्ध कार्य करने के लिये मजबूर करना क्या संविधान के अनुसार अपराधिक कार्य है ?

Yes, it is

Anonymous said...

thanks sharif khan ji, for this post

Anonymous said...

मुसलमान तभी तक मुसलमान है जब तक वह अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत नहीं करता चाहे मां(जननी) हो, वतन हो, पवित्र किताब हो या फिर कुछ और हो।

Anonymous said...

इस्लाम किसी पर थोपा नहीं जा सकता परन्तु यदि इस्लाम धर्म का पालन करने में कोई कठिनाई या अड़चन पैदा की जाती है अथवा धर्म की शिक्षाओं के प्रचार की राह में बाधा उत्पन्न की जाती है या इस्लाम की शिक्षा के खि़लाफ़ कोई भी बात यदि मुसलमानों पर थोपी जाती है तो इन सब कठिनाइयों, अड़चनों और बाधाओं आदि के खि़लाफ़ आवाज़ उठाना हर मुसलमान का कर्तव्य (फ़र्ज़) हो जाता है।

Anonymous said...

ऐसे लोगों के खिलाफ़ कानूनी कार्यवाही करके देश में पनप रहे नफरत के माहौल से देश को बचाने में योगदान करें।

Anonymous said...

मुसलमान तभी तक मुसलमान है जब तक वह अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत नहीं करता चाहे मां(जननी) हो, वतन हो, पवित्र किताब हो या फिर कुछ और हो।

Anonymous said...

देश के प्रति वफ़ादार रहना तो अल्लाह के हुकुम के मुताबिक़ हर मुसलमान की मजबूरी है।

Anonymous said...

देश के प्रति वफ़ादार रहना तो अल्लाह के हुकुम के मुताबिक़ हर मुसलमान की "मजबूरी" है।

DR. ANWER JAMAL said...

वंदे ईश्वरम ! मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा ।

सहसपुरिया said...

अगर वंदे..... गाने से हमको अगर लूट मचाने की आज़ादी मिलती है तो सुबह शाम गाने को तय्यार हैं

Anonymous said...

0 सहसपुरिया जनाब,

आपकी ही गज़ल का एक शेर अर्पित है:

वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे,
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो॥

Anonymous said...

Islamic Personality - Responsibility


From 'Umar (radiyallaahu 'anhu) who said that Allaah's Messenger (salallaahu 'alaihi wa'sallam) said: Each of you is a guardian and is responsible for those whom he is in charge of. So the ruler is a guardian and is responsible for his subjects; a man is the guardian of his family and is responsible for those under his care; a woman is a guardian of her husband's home and is responsible for those under her care; a servant is the guardian of his master's wealth and is responsible for that which he is entrusted with; and a man is the guardian of his father's wealth and is responsible fore what is under his care. So each one of you is a guardian and is responsible for what he is entrusted with.

Hadith Bukharee and Muslim


NOTE :-

So if everyone from this Ummah (Muslim Nation) knew his own position and worth, and realised the responsibility upon him and did not seek to overstep it and take on the responsibilities of others and he carried out the obligations which this placed upon him, then that would be a comprehensive and universal good and a very great treasure through which safety and security would become widespread. Along with this something that is a feature of the Islamic Personality.
(I think this is the meaning MAJBOORI here)

Anonymous said...

MAJBOORI ki bajaaye JIMMEDAARI kehna thik hai.

रंजन said...

"दीन के मामले में कोई ज़बरदस्ती नहीं..."

जितनी जबरदस्ती इस्लाम ने दूसरों पर की है.. शायद और किसी ने नही... पर उपदेश कुशल बहुतेरे

Voice Of The People said...

रंजन जी बात जब कही जाए तो दलील ज़रूरी हुआ करती है. इस्लाम मैं जब्र नहीं और यह हकीकत है.

MLA said...

Hiren Dahimr said...
वन्दे मा तरम का मतलब मै मातृभूमीको वन्दन करता हु. नही की उसकी पूजा ईबादत करता हु.




हिरेन जी "वंदना" का क्या मतलब है???????

वैसे आप सभी एक "वंदे मातरम" के गाने पर ही क्यों अड़े हुए हैं? क्या इससे बढ़कर कोई और देशभक्ति का गाना नहीं है? क्या राष्ट्रिय गीत कोई और नहीं लिखा जा सकता है?

सहसपुरिया said...

कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा
एक क़तरे को समुन्दर नज़र आयें कैसे

DR. ANWER JAMAL said...

कन्या भ्रूण-हत्या
आज गूगल में देख रहा था कि हिंदी दुनिया में क्या चल रहा है ?
इसी दरमियान इस लेख पर नज़र पड़ गयी और मैं इसे उठा लाया आपके लिए,
http://vedquran.blogspot.com/2010/07/islam-is-saviour-of-girlchild.html

Mohammad Ali said...

your view on vandematram recitation and its singing is quiet informative and enough to draw the attention of intellectual gentry. I wish that,may Allah give us the required abilities to resolve the controversial issues which are really not the issues but the game of dirty politics only. wish you all the best for the efforts to bring the actual facts and realities into public notice.

Sharif Khan said...

Etips-Blog Team
इस्लाम की बुनियाद चूंकि अल्लाह के अलावा किसी के आगे सर न झुकाने की है इसलिये तिरंगे को सर झुकाना अगर देशभक्ति की पहचान माना जाएगा तो मुसलमान सर झुकाने के लिये मना कर देगा यह बात अलग है कि, जिस तिरंगे को सर झुकाने के लिये मना कर दिया था, उसकी रक्षा करने के लिये अगर ज़रूरत पड़ी तो उसी सर को कटा देगा जिसको झुकाने से इंकार किया था।

MLA ji aur Hiren Dahimr ji
वन्दे मातरम् का अर्थ आप कुछ भी निकालें इससे उसका भावार्थ नहीं बदल जाएगा। इसके अलावा आप को ज़िद क्या है मुसलमानों को आपके मन के माफ़िक चलने के लिए मजबूर करके मिसगाइड करने की?


रंजन ji!
हो सकता है दीन के मामले में मुसलमानों ने ज़बरदस्ती की हो लेकिन आपका यह ख़याल ग़लत है कि इस्लाम ने ज़बरदस्ती की शिक्षा दी है।

इस पोस्ट के द्वारा मेरा मक़सद हक़ीक़त बयान करना था न कि कोई फ़ज़ीता खड़ा करना।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

आपके बहुत से पोस्ट पढ़े ...
साफ़ है कि विवादस्पद विषयों पर लिखते हैं ... खास कर ऐसी बातों पर जो आपके मज़हब से जुडी हुई है ... या शायद ज़बरदस्ती मज़हबी जामा पहनाया गया है ...
एक पोस्ट क्या ऐसा भी लिखा जा सकता है ... कि अब मुसलमान समाज में मज़हबी बातों के अलावा भी कुछ और बातें जैसे कि ... आधुनिक शिक्षा, विज्ञानं कि बातें, सामाजिक भाईचारे कि बातें ... इनपर तवज्जो दी जाये ... क्या इस पहल की उम्मीद हम आपसे कर सकते हैं ...

विवादस्पद बातों को लिखकर ब्लॉग को आसानी से लोकप्रिय बनाया जा सकता है ... पर असली मुद्दे कहीं खो न जाये ...

आप बुज़ुर्ग हैं ... आलिम हैं ... आपसे कुछ ज्यादा उम्मीद है ..

mustafa khan said...

sharif Sahib, There are more burning issues among muslims, like education system of muslims, How to improve it. How to develop leadership in muslims and how to remove their differencs.Pl try to do something constructive. I know you can. Leave these issues and zero on some real problems faced by muslim today. Inspire them to bounce back and try to achieve their lost glory.Suggest some concrete does and donts to attain some sence of respect within the given farme work. After ruling this country for thousand year at a strach we are living like a third grade citizen.Why? No body is resposible but we our self.Suggest how to attain the lost glory in earliest possible time or we loose it permanently under our own weight.To be more religious is not a solution.To be more practical and realistic is. Use your energy for that or it is lost in non-issues. I am more serious. I hope you will not mind.